OPS verses NPS 2023


पुरानी पेंशन स्कीम वर्सेस, नई पेंशन स्कीम।(OPS verses NPS )2023


31 दिसंबर 2003 तक सभी शासकीय कर्मचारियों को मिलने वाली पेंशन को। पुरानी पेंशन स्कीम या फैमिली पेंशन कहा जाता है इस पेंशन स्कीम में पेंशन की पूरी वित्त्तीय देनदारी  शासन की रहती थी कर्मचारियों की सैलरी से कोई रकम पेंशन के नाम पर नहीं काटी जाती थी।

                  OPS verses NPS 2023



पेंशन का इतिहास?(Pension history)

टाइम लाइन 

१-भारत में पेंशन की उत्पत्ति ब्रिटिश शासन 1881 से हुई।
२- सन 1924 में रॉयल कमीशन द्वारा अपने शासकीय कर्मचारियों को सक्रिय सेवा के दौरान आधे वेतन को पेंशन के रूप में देने की सिफारिश की गई।

 ३-भारत सरकार अधिनियम 1935 के ज्यादातर प्रावधानों को भारत सरकार द्वारा अपने में समाहित कर लेने से यह आजाद भारत में अस्तित्व में आई।
४- 1 जनवरी 2004 को अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा इसको समाप्त करके नई पेंशन स्कीम को प्रभाव में लाया गया।
५- पश्चिम बंगाल तथा  त्रिपुरा ऐसे राज्य थे जिन्होंने जनवरी 2004 से एनपीएस को लागू नहीं किया था।
६- त्रिपुरा द्वारा सन 2015 में OPS  को समाप्त कर एनपीएस को लागू कर दिया गया था अतःपश्चिम बंगाल एकमात्र राज्य है जिसने कभी एनपीएस को लागू नहीं किया गया। 

वर्तमान में ओ पी एस कहां लागू है?

1-भारतीय सशस्त्र बलों में कार्यरत  सैनिकों को ओ पी एस  में रखा गया है। 
2-सासंदो और विधायकों को मृत्यु तक 5 साल का एकल कार्यकाल पूरा करने के बाद भी अन्य सभी लाभों के साथ पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिलता है ।
3-12 साल की सेवा के बाद न्यायाधीशो को ओ पी एस  पेंशन प्राप्त होती है।

ओ पी एस  एवं एनपीएस में अंतर।(Difference between OPS and NPS.)

१-पुरानी पेंशन व्यवस्था में वित्तीय देनदारी की जिम्मेवारी शासन की होती है कर्मचारी की कोई पेंशन कटौती नहीं होती है  जबकि एनपीएस में कर्मचारियों की सैलरी से प्रतिमाह दस प्रतिशत राशि काटकर पेंशन फंड में डाले जाते हैं ।
२-पुरानी पेंशन स्कीम में कर्मचारियों को निश्चित राशि पेंशन (मूल वेतन का आधा प्लस महंगाई भत्ता) के रूप में प्राप्त होता था एनपीएस में पेंशन की राशि निश्चित नहीं है यह बाजार जोखिमों (शेयर मार्केट)  के ऊपर निर्भर है।
३-पुरानी पेंशन सरकार की वित्तीय जिम्मेवारी थी। एनपीएस में सरकार की ऐसी कोई जिम्मेदारी नहीं है। बल्कि केंद्र सरकार कर्मचारियों के एनपीएस अकाउंट में प्रतिमाह उसकी सैलरी का 14% डालती है।
४-पुरानी पेंशन प्रणाली में कर्मचारी की मृत्यु पर उसके उत्तराधिकारी को आजीवन फैमिली पेंशन प्राप्त होती थी वही एनपीएस में मृत्यू पर कर्मचारियों द्वारा जमा एनपीएस राशि का100 प्रतिशत उसके नामनी को दे दिया जाता है यदि नॉमिनी को पेंशन चाहिए तो उसे 80% राशि को पेंशन फंड में डालना होगा व 20% राशि एक मुश्त उसको वापस दी जाती है।
५-ओ पी एस में कर्मचारियों के रिटायरमेंट के समय20 लाख रुपए की ग्रेच्युटी प्राप्त होती है जबकि एनपीएस में यह प्रावधान नहीं है।
६-ओ पी एस में कर्मचारियों से जीपीएफ फंड कटवाया जाता है। यह राशि पूर्णतया इनकम टैक्स मुक्त है जबकि एनपीएस में यह व्यवस्था नहीं है।
७-ओ पी एस  में रिटायर कर्मचारियों को अगले 10 वर्ष से वेतन आयोग का लाभ प्राप्त होता है जबकि एनपीएस में ऐसा कुछ नहीं होता।
८-ओ पी एस  में रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को जीपीएफ की पूरी राशि प्राप्त होती है। वही एनपीएस में अर्जित राशि का 60% ही मिलता है बाकी 40% राशि नहीं प्राप्त होती है। 
९-पुरानी पेंशन में रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को मेडिकल फैसिलिटी प्राप्त होती है जबकि एनपीएस में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
१०-ओ पी एस  में कर्मचारी अपनी पेंशन राशि का 40% सारांशिकरण (Commute)  करके उसे एकमुस्त ले सकता है जबकि एनपीएस में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।

पुरानी पेंशन व्यवस्था क्यों बंद कर दी गई?


 इसको बंद करने का प्रमुख कारण शासन के वित्तीय बजट में बढ़ता पेंशन बोझ है मौजूदा सेवानिवृत्ति लोगों के लिए पेंशन देनदारियां 2022-23 में केंद्र सरकार की 2.07 लाख करोड़ रुपए है वही सभी राज्यों की पेंशन देनेंदारियां 2022-23 के लिए संयुक्त रूप से 4,63 ,436.9 करोड़ रुपए है।

पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन। 

कर्मचारियों द्वारा एनपीएस के दुष्प्रभाव को देखते हुए समय-समय पर ओ पी एस बहाली हेतु आंदोलन चलाया गया है। 
 कई राजनीतिक पार्टियों द्वारा ओ पी एस  बहाली एवम पुरानी पेंशन को लेकर किए गए वादे से एवं कई राज्यों ने ओ पी एस  को वापस बहाल करने के कारण  इस आंदोलन को तेजी से बल मिला है। 

उपसंहार। 

वृद्धावस्था में शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक स्तर में गिरावट प्राकृतिक लक्षण है ऐसे में शासन द्वारा अपने कर्मचारियों का भरण -पोषण प्राथमिक जिम्मेवारी है अतः शासन को पेंशन के रूप में अपनी जिम्मेदारी का निर्वाहन करते हुए एक दूरगामी एवम  सर्वमान्य निर्णय लेकर इस समस्या का स्वाभाविक हल निकालना चाहिए।
FAQ 
1-वर्तमान में पुरानी पेंशन स्कीम। लागू करने का जानकारी किन राज्यों ने दियाहै?
-राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश की सरकारों ने केंद्र सरकार और पेंशन कोष नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) को अपने कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने के फैसले के बारे में सूचित किया है।

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