Happy Deepawali

 Happy Deepawali-दीपावली का त्यौहार कब क्यों

 और कैसे मनाते हैं-


अंधेरे में उजाले की जीत का पर्व दीपावली विश्व स्तर पर हिंदू समुदाय  द्वारा मनाया जाने वाला प्रमुख त्यौहार है। इसे त्योहारों का राजा या समूह भी कहते हैं तो आईए जानते हैं हैप्पी दीपावली(Happy Deepawali  )के बारे में-

>Happy Deepawali 


दीपावली कब मनाते हैं?

 दीपावली प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला पौराणिक उत्सव है। यह कार्तिक मास की अमावस्या को  मनाया जाता है। यह त्योहार पांच दिनों तक चलता है  जो धनतेरस (दीपावली से 2 दिन पहले )से शुरू होकर भैया दूज दीपावली मुख्य त्यौहार की (दो दिन बाद) तक मनाया जाता है इस वर्ष दीपावली 20 अक्टूबर 2025 को पंचांग के अनुसार मनाया जाना है।


दीपावली क्यों मनाते हैं?

 दीपावली या दिवाली का त्योहार अमावस की काली अंधेरी रात पर रोशनी की विजय पताका का त्यौहार है हिंदू ग्रंथो के  अनुसार त्रेता युग में जब भगवान राम दुराचारी रावण को मार कर पत्नी सीता सहित अयोध्या वापस लौटे तो उस दिन अमावस्या थी लेकिन संपूर्ण प्रजा  ने राम के स्वागत में पूरे अयोध्या को घी के दीयों  की रोशनी से जगमग कर दिया और अपने भगवान का स्वागत एवं आशीर्वाद लिया ।

एक और कथा के अनुसार लंबे चले समुद्र मंथन के फल स्वरूप लक्ष्मी का प्रादुर्भाव हुआ और इसी दिन लक्ष्मी और विष्णु को विवाह संपन्न हुआ था इसलिए इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करके भक्तगण सुख ,शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं।

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दीपावली कैसे मनाते हैं? 

पूरे 5 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है इस दिन धन के देवता धनवंतरी और कुबेर की पूजा अर्चना की जाती है कार्तिक मास की त्रयोदशी में रहने कारण से धनतेरस कहा जाता है इस दिन भगवान धन्वंतरि का जन्म माना जाता है और वह अपने साथ सदैव कलश रखते थे अत इस दिन मानने वाले बर्तन और चांदी खरीद कर अपने धन-धान्य में वृद्धि की कामना करते हैं।

ॐ-दीपावली पर्व का दूसरा दिन नरक चौदस या रूप चौदस के नाम से जाना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने इस दिन नरकासुर नामक राक्षस को मार कर उसके चंगुल से 16000 रानियां को मुक्त कराया था। इस दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करने का बहुत महत्व है इस दिन की पूजा अर्चना यमराज को समर्पित करने से घर में अकाल मृत्यु नहीं होती।

ॐ-दीपावली का मुख्य त्योहार लक्ष्मी पूजा एवं आतिशबाजी के लिए जाना जाता है। इस दिन परिवार के सभी सदस्य घर को फूलों से सजाते हैं। व पूजा पाठ करके दोस्तों रिश्तेदारों में मिठाइयां बांट कर भगवान राम की वापसी की खुशी मनाते हैं एवं मां लक्ष्मी एवं भगवान  गणेश की पूजा अर्चना करके धन-धान्य के साथ सुख व  समृद्धि की कामना की जाती है ।

ॐ-दीपावली का अगला दिन गोवर्धन पूजा के नाम से मनाया जाता है। इस दिन गायों की पूजा की जाती है। इसे अन्नकूट उत्सव के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता के अनुसार देवराज इंद्र को एक बार अहंकार हो गया था कि वह संसार का रक्षक है। इसलिए उसने ब्रिज क्षेत्र में मूसलाधार बारिश की उसके अहंकार को तोड़ने व बृजवासियों की रक्षा करना हेतु भगवान श्री कृष्ण ने अपनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर बृजवासियों की रक्षा की जिससे प्रतिवर्ष यह गोवर्धन पूजा के नाम से जाना जाता है।

ॐ-दीपावली उत्सव का अंतिम त्यौहार भाई दूज के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार यमुना ने यमराज को अपने घर पर सत्कार पूर्वक भोजन कराया था व उन्हें अपना भाई माना था जिससे उसने नरक के जीवन की यात्रा से मुक्ति का वरदान प्राप्त किया था अतः  इस दिन जो भाई अपनी बहन के यहां प्रेम पूर्वक भोजन    करके उनको आभूषण व उपहार देते हैं उनकी समस्त कामनाएं पूर्ण होती है।

हिंदुओं के अलावा कौन-कौन इस त्यौहार को मनाता है ।


हिंदू के अलावा जैन समुदाय द्वारा इसी दिन 24 वें तीर्थंकर महावीर स्वामी का मोक्ष दिवस मनाया जाता है इसके अलावा सिख समुदाय इस दिन को बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाते हैं क्योंकि इस दिन सन 1619 में सिखों के छठवें गुरु हरगोविंद सिंह जी को जेल से रिहा किया गया था।

भारत के अलावा नेपाल में इसे 'तिहार, के रूप में जाना जाता है। नेपाल में दीपावली को नेपाल में पुराना कैलेंडर समाप्त होकर गोवर्धन पूजा से नया संवंत शुरू होने की खुशी के रूप में मनाया जाता है इसके अलावा विश्व में जहां भी भारतीय पाए जाते हैं वहां भी दीपावली का उत्सव उत्साह से मनाया जाता है।

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उपसंहार। 

रोशनी का महापर्व दीपावली हमारे जीवन में उत्साह ,संपन्नता व पारिवारिक एकता का प्रमुख स्रोत है किंतु कुछ लोग इस उत्सव पर  नशा व जूआ  के कारण इसको बदनाम करते हैं इसके अलावा बढ़ता पटाखों का प्रयोग बुजुर्गों एवं बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा  प्रभाव डालता है अतः हम सभी को चाहिए कि प्रशासन के सभी नियम और नियमावली का पूर्णता पालन करते हुए इस त्यौहार को पूर्ण उत्साह व खुशी पूर्वक मना कर अपनी आमदनी का कुछ हिस्सा उन लोगों को दान देना चाहिए जो इस त्यौहार को मनाने में आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं।

FAQ

Q1-भारत में आयुर्वेद दिवस कब मनाया जाता है?

-भारत में आयुर्वेद दिवस प्रतिवर्ष भगवान  धनवंतरी के जन्म दिवस धनतेरस में मनाया जाता है यह वर्ष 2016 से प्रतिवर्ष मनाया जा रहा है।

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